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Nishant Jain

23rd January 2021

जीवन में हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहींः निशांत जैन

"अगर आप सफल होना चाहते हैं तो हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाएं पहली कक्षा से सीखें। मेरी समझ से सफलता के लिए दोनों भाषाओं पर पकड़ जरूरी है। एक भाषा में आप एक्स्ट्रीमली गुड हों और दूसरे में रीजनेबली गुड हों, तब भी चलेगा।" यह कहना है, प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से आयोजित कलम उदयपुर में अतिथि वक्ता निशांत जैन का। हिंदी माध्यम के सिविल सर्विसेज टॉपर रहे जैन राजस्थान टूरिज्म में निदेशक हैं। अपने प्रशासनिक दायित्वों के बीच वह ऐसे लेखक हैं, जो हिंदी पट्टी के युवाओं को प्रेरित करते हैं। अहसास वूमेन की ओर से स्वाति अग्रवाल ने जैन के संक्षिप्त परिचय दिया व स्वागत किया तो पूनम आनंद ने बातचीत की।  

आनंद ने जैन से पहला सवाल उनके बचपन के अनुभव व यादों के बारे में पूछा। जैन का उत्तर था, "मेरा बचपन सुख सुविधाओं से भरा नहीं था, पर माता-पिता ने एक दिशा दी। हिंदी माध्यम के स्कूल में था। साहित्यिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेता था। आठवीं में कविता लिखने लगा। लोकल अखबार में उसी उम्र में वह कविता छप भी गई। तब से यह सिलसिला आज तक कायम है। मेरठ में प्रकाशन उद्योग बहुत है। दसवीं के बाद प्रूफ रीडिंग शुरू कर चुका था, जिससे पढ़ने को बहुत कुछ मिला। मेरी हिंदी भी अच्छी हुई।" मेरठ के मेले, नौचंदी मेला, सदर बाजार से जुड़े सवाल पर जैन का उत्तर था, "हर कोई अपने बचपन के शहर को लेकर बहुत नास्टैल्जिक रहता है। मेरठ इतिहास, संस्कृति का बड़ा शहर है। वह अक्खड़ शहर है। आज हिंदी की मानक खड़ी बोली उसी इलाके में बोली जाते हुए देश भर में फैली।"

यूपीएससी में आपके चयन पर आपके परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी? के उत्तर में जैन ने कहा, "मैं सामान्य मध्यवर्गीय परिवार का सदस्य था। हिंदी माध्यम से था। मैं फैमिली मैन हूं, होम सिक हूं। मेरे बनने में मेरे परिवार की बड़ी भूमिका थी। मेरे मम्मी-पापा, मेरे भैया चट्टान की तरह मेरे साथ खड़े रहे।" सिविल सेवा में हिंदी छात्र के रूप में किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है? पर जैन का उत्तर था, "हिंदी माध्यम से अभी भी केवल पांच-दस पर्सेंट लोग सफल हो रहे। हिंदी माध्यम के छात्रों में आत्मविश्वास की बहुत कमी होती है। वे हीन भावना का शिकार होते हैं। हिंदी में मीटिरियल की भी कमी है। फिर बोर्ड भी यह चाहता है कि आप अंग्रेजी में बोलें। इसलिए आप को दोनों भाषाओं पर पकड़ बनानी चाहिए।

अपनी पुस्तकों से जुड़े सवाल पर जैन ने मुझे बनना है UPSC टॉपर, रुक जाना नहीं, राजभाषा के रूप में हिंदी, सिविल सेवा परीक्षा के लिए निबंध, बाल साहित्य की पुस्तक शादी बंदर मामा की आदि की चर्चा की। आपने रुक जाना नहीं जैसी किताब हिंदी में क्यों लिखी? पर जैन का उत्तर था, "मैं हिंदी का लेखक हूं। हिंदी में नान-फिक्शन किताबें बहुत कम हैं। कथा, उपन्यास, कविता और नाटक बहुत लिखा गया। अंग्रेजी का पाठक दो फिक्शन और दो नॉन फिक्शन पढ़ता है। हिंदी पट्टी के लोगों के सोचने का तरीका अलग है। हिंदी के लोगों ऐसी किताबों की जरूरत है।" आपको क्या लिखना पसंद है? के सवाल पर जैन का उत्तर था, "नॉन फिक्शन पसंद है। कविताएं पसंद हैं। हो सकता है कभी फिक्शन लिखूं। वह लेखक जो कम शब्दों में बड़ी बात कह दे मुझे पसंद हैं। कबीर, निराला, नागार्जुन, दुष्यंत पसंद हैं, पर मेरे पसंदीदा कवि हैं निराला। उनकी कविताओं में विविधता बहुत है। उनकी कविता 'राम की शक्तिपूजा' बहुत पसंद है। वह अद्भुत प्रेरणादायी है।"

आगे क्या लिखना चाहते हैं? पर जैन का उत्तर था, "यहां काम के चलते लिखना कम है। एक ट्रैवलॉग लिखने का प्लान है। सेल्फ हेल्प ग्रुप के लिए महावीर की शिक्षाओं पर लिखना चाहता हूं कि उनके उपदेश को डेली लाइफ का कैसे इस्तेमाल करें।" जैन ने नई वाली हिंदी व पुरानी वाली हिंदी पर भी अपनी बात कही और माना कि इसमें कोई अंतर नहीं है। यह ब्रांडिंग का एक तरीका है। नई वाली हिंदी हो या पुरानी वाली हिंदी, हम युवाओं को हिंदी में पढ़ने के लिए कैसे प्रेरित करें, इस दिशा में प्रयास करना चाहिए। जैन ने भाषा के विकास में प्रभा खेतान फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे प्रयासों और कलम जैसे आयोजनों की तारीफ की और माना कि कलम ने सत्या व्यास, दिव्य प्रकाश दुबे, निलोत्पल मृणाल जैसे लेखकों को अपने आयोजनों में बुलाया, जिनकी पुस्तकें लाखों में बिकती हैं।

युवा पाठक को रुक जाना नहीं क्यों पढ़ना चाहिए पर जैन ने कहा कि यह किताब संवाद की शैली में लिखी गई है। इसमें ऐसी बात लिखी गई है, जिसे पढ़कर आपके जीवन को दिशा मिलेगी। उन्होंने इसके कई अध्यायों के उल्लेख के साथ बताया कि मैंने गीता का निष्काम दर्शन, जैन दर्शन के अनेकांत व बौद्ध दर्शन के मध्यमार्ग को जोड़कर यह समझाने की कोशिश की है कि किताबों के आगे जहां और भी है या फिर असफलता को कैसे हैंडल करें। सिविल सर्विसेज के लिए क्या सब कुछ छोड़ देना चाहिए? पर जैन ने कहा कि मैं ऐसा नहीं सोचता। यह ठीक है कि हार्ड वर्क का कोई विकल्प नहीं है। जीवन में शार्टकट कुछ नहीं है। पर आप खुशी के साथ लोगों से जुड़कर काम करिए।

आपकी सफलता का मूल मंत्र? क्या है, पर जैन का उत्तर था कि आप अपनी लकीर बड़ी कर लें। आप ऐसा काम करें कि लोगों का ध्यान आप पर जाए। आप अपनी असफलताओं से क्या सीखते हैं? पर जैन ने कहा कि मैंने बहुत असफलता नहीं देखी। लेकिन पहले प्रयास में जब मैं यूपीएससी में प्रीलिम्स में ही नहीं आया तो मेरे घर वालों, दोस्तों, शिक्षक ने बहुत संभाला। उन्होंने अपने तीन दोस्तों और उनके सपनों का भी जिक्र किया। जैन ने बुक, ट्रैवल, म्युजिक, सिनेमा को अपनी हाबी बताया और लोगों से मेल-मुलाकात को अपनी पांचवीं हाबी बताया।

उन्होंने शोभा के ट्रैफिक से जुड़े सवाल का संक्षिप्त उत्तर दिया। अहसास वूमेन राजस्थान से जुड़ी अपरा कुच्छल के राजस्थान टूरिज्म से जुड़े सवाल पर जैन ने विस्तार से अपनी बात रखी और कहा कि पोस्ट कोविड दौर में हम कुछ मेले को रिज्युम करने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी मार्केटिंग की कोशिश भी करेंगे। 2020 में टूरिज्म पॉलिसी आई है, उसको भी इंप्लीमेंट करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी हम इनक्रैडिबल इंडिया में शुरू के पांच राज्यों में आते हैं। हमारे पास वह सब कुछ है कि हम पहले नंबर पर आ जाएं। अहसास वूमेन उदयपुर की ओर से कनिका अग्रवाल, मुमल भंडारी, रिद्धिमा दोशी, श्रद्धा मुर्डिया, शुभ सिंघवी और स्वाति अग्रवाल ने सक्रिय भागीदारी निभाई। 

#कलम उदयपुर के प्रायोजक हैं श्री सीमेंट। हॉस्पिटैलिटी पार्टनर रैडिसन ब्लू उदयपुर पैलेस रिसॉर्ट और स्पा तथा अहसास वूमेन उदयपुर का सहयोग मिला। 

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