Naveen-Choudhary

Naveen Choudhary

12th March 2021

राजनीति में हमें निजी हमले से बचना चाहिएः नवीन चौधरी

कलम नागपुर के इस सत्र में अतिथि वक्ता थे लेखक नवीन चौधरी। प्रभा खेतान फाउंडेशन और अहसास वूमेन नगपुर की ओर से प्रवीण तुली ने चौधरी का स्वागत करते हुए उनका परिचय दिया और आगे के संवाद के लिए प्रियंका कोठारी को आमंत्रित किया। कोठारी ने पहला सवाल चौधरी की पुस्तक जनता स्टोर के नाम को लेकर पूछा? चौधरी ने बताया कि जयपुर में जनता स्टोर एक दुकान का नाम था। यह सत्तर के दशक की बात है जब वह दुकान खुली थी और बाद में बंद हो गई। फिर भी लोग आज उस जगह का नाम जनता स्टोर के रूप में लेते हैं। मतलब जो दिख रहा है वह दिख नहीं रहा। हमारे लोकतंत्र की भी हालत आज ऐसी ही है। इसमें भी केवल तंत्र ही हाबी है, लोक गायब है। मेरी पुस्तक का कवर भी ऐसा ही है। बच्चे उसके अंदर जा रहे हैं या बाहर निकल रहे हैं, आप अपने हिसाब से समझिए। यह पिंक सिटी की कहानी है।

पुस्तक लेखक बनने के बैकग्राउंड का जिक्र होने पर चौधरी ने बताया कि मेरी लेखकीय क्षमता के बारे में भी किसी ने मुझे बताया। पांच-छः साल मुझे यही समझने में लगा कि लिखने की स्टाइल, भाषा सरल रखूं। मेरे दिमाग में कभी उपन्यास की बात नहीं थी। आप को याद होगा कि छात्र राजनीति को लेकर 2016 में एक बहस छिड़ी थी। लोग उसके पक्ष में थे या विपक्ष में। जेएनयू में, डीयू पर मैंने ब्लॉगिंग में जो लिखा, लोग पढ़ रहे थे। किताब लिखते समय क्या आपको पता था कि आपकी किताब छप जाएगी? चौधरी का जवाब था कि मुझे पता था कि मैं प्रकाशक को इस तरह पिच करूंगा तो मेरी किताब छप जाएगी। बतौर लेखक हमारी इच्छा कुछ और होती है, हम करते कुछ और हैं। मेरी बुक हिट हो गई तो लोग जान गए। मार्केटिंग और राइटिंग दोनों बेहद अलग चीजें हैं। मार्केटिंग आपको टिका नहीं सकता। कंटेंट ही आपको जिंदा रखता है। मेरी किताब को पढ़ कर दो तरह की प्रतिक्रिया आई। एक लोगों ने कहा कि अरे मैंने इसको जीया है। दूसरा लोगों ने कहा कि अरे ऐसा होता है, मुझे पता नहीं है।

चौधरी ने स्वीकारा कि जनता स्टोर के लिखने के दौरान मेरी यह इच्छा थी कि इस पर फिल्म बने। इस पर वेब सीरीज बन रही है। राजनीति में जातिवाद पर उनका मत था कि यूपी, बिहार से अलग तरह का जातिवाद राजस्थान में है। यहां जाट और राजपूतों के बीच में एक स्ट्रांग दुश्मनी है। उन्होंने वसुंधरा राजे का उदाहरण दिया कि उन्होंने अपने को राजपूत, जाट और गूजरों से कैसे जोड़ा। स्टुडेंट युनियनों पर मनी और राजनीति हाबी है। जेएनयू को छोड़कर बाकी जगह अलग तरह की पॉलिटिक्स होती है। जनता स्टोर में लड़की से रेप, एग्ज़ाम पेपर लीक के मुद्दे हैं। छात्र राजनीति के लिए संदेश पर चौधरी का उत्तर था कि इलाहाबाद की तुलना में राजस्थान में छात्र राजनीति में हिंसा का असर कम है। राजनीति को अगर हम बेहतर करना चाहते हैं तो आपको अच्छे लड़कों को राजनीति के लिए मौका देना होगा। आलम यह है कि डंडे चलाने वाला आदमी गांधी स्टडीज में एडमिशन ले लेता है, ताकि वह चुनाव लड़ सके। छात्र राजनीति में पैसे की भी बड़ी भूमिका है। पोस्टर पूरे शहर में दिखाई देते हैं। बड़ी गाड़ियों का जुलूस कैसे निकलता है। जेएनयू की चुनाव प्रक्रिया को पूरे देश में अपनाया जाना चाहिए। वहां धनबल की जगह विचार ही आगे बढ़ते हैं।

कोठारी के इस सवाल पर कि अगर छात्र राजनीति में इतना करप्शन व निगेटिविटी है, तो क्या राजनीति का माहौल बदल सकता है? चौधरी ने यह माना, "यह अभी संभव नहीं लगता। पॉवर करप्ट करता है। यह ह्युमन नेचर है। जब आपको लगता है कि सच्चाई आपकी मदद नहीं कर सकती तो आप बेईमानी का साथ दे देते हैं। यहां तक कि हम जब वोट देने जाते हैं तो ईमानदार की जगह उसे वोट दे देते हैं जो जीत रहा है।" बिहार के चुनावों के दो बेहद पढ़े-लिखे और ईमानदार, मेहनती लोगों की हार का जिक्र करते हुए चौधरी ने कहा कि अलग राजनीति के लिए रेडी फॉर चेंज के लिए तैयार होना पड़ेगा।

आपकी किताब में वूमेन कहां हैं? के सवाल पर चौधरी ने पूछा कि राजनीति में भी वूमेन कहां हैं? देश में अब तक केवल एक महिला प्रधानमंत्री, एक राष्ट्रपति बन सकीं, उसी पर हम ताली बजाते हैं। राजस्थान में भी कितनी महिला मुख्यमंत्री बनीं? छात्र राजनीति में भी महिला प्रेसिडेंट नहीं बनती। नीचे की पोस्ट पर आती हैं। जनता स्टोर आपबीती है, तो आपने इसे फिक्शन क्यों बना दिया? के उत्तर में चौधरी ने कहा कि इसकी घटनाएं अलग-अलग जगह घटीं। फिर भी इतने सालों में मेजर चेंज नहीं आया था। पेजर की जगह मोबाइल आ गया। लोग पहले सीधे संपर्क कर लेते थे। राजस्थान युनिवर्सिटी में शेड्युल कास्ट के कितने लड़के प्रेसिडेंट बने? नीचे की सीट पर जरूर उसे मौका मिल जाता है। आरक्षण के बावजूद राजनीति में बिना धनबल के नीचे के लोग अपनी कैटेगरी में भी दब जाते हैं।

सवाल-जवाब के सत्र में अक्षत पुरी का उत्तर देते हुए चौधरी ने कहा लोग यह सोच रहे थे कि मैं किस विचारधारा का हूं? मेरा मानना है कि राजनीति ऐसी ही है। लोगों ने साइड पकड़ लिया है। आपको राइट या लेफ्ट से अलग 'सही और गलत' के पक्ष में खड़ा होना चाहिए। कोई भी सरकार जनता के लिए काम नहीं करती। सभी अपने लिए काम करते हैं। उनसे हमें काम कराना आना चाहिए। राजनीति में हमें निजी हमले से बचना चाहिए। कोई मुझे संघी मानता है तो कोई लेफ्टिस्ट। एक आदमी दोनों कैसे हो सकता है। हमें बातचीत के लिए जगह देनी चाहिए। संवाद तभी हो सकता है।

निधि यादव के सवाल कि जातिवाद का प्रभाव कैसे बदले? चौधरी ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों को छोड़कर हर युनिवर्सिटी में जाति हाबी है। जब तक गांव में कॉस्ट कल्चर चेंज नहीं होगा, तब तक यह स्थिति बदल नहीं सकती। विभा विलास के सवालों के उत्तर में चौधरी ने कहा कि अच्छा उम्मीदवार वह है जो आपके इलाके को जानता है। लोगों से, आपकी समस्या से जुड़ा है। अगर कोई पढ़ालिखा आदमी राजनीति से जुड़ता है तो वह अच्छा कर सकता है। कॉस्ट और जेंडर डिस्क्रिमिनेशन में जेंडर डिस्क्रिमिनेशन ज्यादा है। जॉब में भी जेंडर डिस्क्रिमिनेशन है। टीचिंग में फीमेल हैं, इंजीनियरिंग में भी हैं, पर फीमेल साफ्टवेयर इंजीनियर बने, सिविल इंजीनियर नहीं। हमने ऐसा बना दिया है कि सड़क पर निकलने वाला काम लड़कों का है।

कलम नागपुर के प्रायोजक हैं श्री सीमेंट। हॉस्पीटैलिटी पार्टनर रेडिसन ब्लु, मीडिपा पार्टनर लोकमत और अहसास वूमेन नागपुर का सहयोग मिला

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