WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.29 (2)

Anant Vijay

18th March 2021

अमेठी संग्राम एक परिवार के खिलाफ जनता के उठ खड़े होने की कहानी: अनंत विजय

कोरोना वैक्सिनेशन ड्राइव के बीच कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रभा खेतान फाउंडेशन के वर्चुअल और जमीनी कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है। इसी क्रम में कलम नोएडा में अतिथि वक्ता के रूप में बहुचर्चित पुस्तक 'अमेठी संग्रामः ऐतिहासिक जीत, अनकही दास्तां' के लेखक अनंत विजय ने शिरकत की। फाउंडेशन और अहसास वूमेन की ओर से उनका स्वागत दीपाली भसीन ने किया। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन भारत और विदेश के 30 के करीब शहरों में महिलाओं की तरक्की के साथ ही साहित्य, संस्कृति और सेवा से जुड़े अभियान चला रहा है। अब तक 550 से अधिक ऑनलाइन और 1500 से अधिक जमीनी इवेंट आयोजित कर चुका है। अतिथि वक्ता का परिचय देते हुए उन्होंने बताया कि अनंत विजय जानेमाने लेखक, आलोचक व पत्रकार हैं। करीब ढाई दशक से टीवी और प्रिंट पत्रकारिता में सक्रिय हैं और राजनीति, साहित्य और सिनेमा पर समान रूप से लिखते हैं। विजय की शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि विजय की अब तक बारह पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें प्रसंगवश, कोलाहल कलह में, विधाओं का विन्यास, बॉलीवुड सेल्फी, लोकतंत्र की कसौटी और मार्क्सवाद का अर्धसत्य काफी चर्चित हैं। इन दिनों आपकी नई पुस्तक अमेठी संग्राम काफी धूम मचाए हुए है। दैनिक जागरण समूह में एसोसिएट एडिटर विजय सिनेमा पर उत्कृष्ट लेखन के लिए नेशनल फिल्म फेस्टिवल के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार 'स्वर्ण कमल' से सम्मानित हैं। संवादकर्ता वर्तिका नंदा का परिचय देते हुए उन्होंने बताया कि आप पत्रकार, अध्यापक, समाजसेवी और जेल सुधारक हैं। देश की जेलों पर तिनका-तिनका नामक अनूठी श्रृंखला चलाती हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हैं। जेलों पर आपका काम लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में दो बार दर्ज है। कवयित्री हैं और आपकी कई पुस्तकें प्रकाशित हैं।

नंदा ने एक चिड़िया द्वारा आग बुझाने की कोशिशों का जिक्र करते हुए विजय की पुस्तक अमेठी संग्रामः ऐतिहासिक जीत, अनकही दास्तां के लेखन के पीछे की वजह पूछी। विजय ने फाउंडेशन का आभार प्रकट करते हुए बताया कि मई 2019 में जब लोकसभा चुनाव के परिणाम आ रहे थे, तो अमेठी के नतीजों को लेकर मेरी बहुत उत्सुकता थी। मैं अमेठी की मतगणना पर लगातार नजर रखे हुए था। राहुल हर राउंड में लगातार पिछड़ते जा रहे थे। सिवाय जायस की मतगणना को छोड़कर। नौवें-दसवें राउंड तक यही स्थिति बनी रही, जब चुनाव आयोग ने नतीजों की घोषणा नहीं की थी, तभी राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी हार स्वीकार कर ली। मुझे याद नहीं आता कि 136 साल पुरानी पार्टी में कोई भी कांग्रेस अध्यक्ष कभी लोकसभा चुनाव हारा था। उधर स्मृति इरानी ने भी दुष्यंत कुमार की पंक्ति ट्विट किया कि कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता... लेकिन राहुल की हार की स्वीकृति से मेरे अंदर की जिज्ञासा जगी। राहुल गांधी वह पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी हार को स्वीकारा।

एक सवाल के उत्तर में विजय ने यह बताया कि इस किताब को लिखने के पीछे उनके अंदर का पत्रकार सजग था। इसके लिए उन्होंने रोचकता का पुट बनाए रखा। नंदा के इस सवाल पर कि अमेठी संग्राम में बेहद रोचक शैली में इस बात का जिक्र है कि मतगणना के दौरान स्मृति इरानी गाने सुन रही थीं, तो ये गाने कौन से थे? विजय का उत्तर था, "इस पुस्तक को लिखने के दौरान मैंने उनसे सिर्फ बारह मिनट में बातचीत की थी, जिसमें उन्होंने सत्रह सवालों का जवाब दिया था। मेरे पास इतनी सामग्री थी कि मुझे स्मृति जी से मिलने की जरूरत नहीं महसूस हुई।" विजय का कहना था कि वे अमेठी संग्राम पर आलोचकों की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अभी तक जितने भी लोगों ने प्रतिक्रिया जाहिर की है, उन सबने तारीफ ही की। नंदा के इस सवाल पर कि आपने जिन कांग्रेसियों को पुस्तक लिखने में बिना नाम लिखे आभार प्रकट किया है, उनकी प्रतिक्रिया क्या थी? विजय का जवाब था कि सबने कहा कि ठीक लिखा है। अमेठी के एक स्थापित कांग्रेसी के बयान का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय नेता भी चाहते थे कि राहुल के जीत की मार्जिन कम रहे। लिहाजा कार्यकर्ताओं ने ऐसा मार्जिन कम कराया कि वे चुनाव हार ही गए। राहुल गांधी के स्वभाव की चर्चा करते हुए विजय ने कहा कि वे किसी से नाराज होते हैं, तो उससे रूठ जाते हैं, बात करना बंद कर देते हैं। इसका बड़ा नुकसान होता है। अमेठी के कांग्रेसियों ने ही कहा था कि राजा का काम है गलती पर दंड देना और खुश होने पर पुरस्कार देना। जबकि राहुल ऐसा नहीं करते। इसी तरह राजीव गांधी के समय तक अमेठी के लोगों से इस परिवार का रागात्मक संबंध था, पर अब यह बात नहीं है।

अपनी लेखकीय यात्रा पर विजय ने कहा कि मेरी शुरुआती तीन-चार किताबें बचकानी हैं। अमेठी संग्राम की लेखकीय यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि अमेठी के ऐतिहासिक महत्त्व वाला हिस्सा लिख कर हटाना पड़ा। पांच बार अमेठी और गोवा भी गया। क्योंकि गोवा के कई कार्यकर्ताओं ने अमेठी में मदद की। देश भर के कार्यकर्ताओं, नेताओं से बातचीत की। इतनी जानकारी इकट्ठा हो गई कि सेकंडरी सोर्स की बहुत सारी जानकारी हटानी पड़ी। विजय ने इस पुस्तक के संपादकों की मदद का भी उल्लेख किया। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई की स्वीकारोक्ति का भी जिक्र किया और बताया कि अमेठी में नरेंद्र मोदी की रैली अमित शाह के नहीं बल्कि मनोहर पर्रिकर के कहने पर हुई थी। पत्रकार विनोद मेहता नमन करते हुए विजय ने उनकी पुस्तक आनंद भवन टू अमेठी से मदद का भी उल्लेख किया। विजय ने कहा कि मेहता को अमेठी में 1977 में जो स्थिति मिली मुझे वही स्थिति 2019 में मिली। फर्क सिर्फ इतना आया कि तब बस स्टैंड पर ट्रांजिस्टर होता था, इस समय लोगों के हाथों में मोबाइल होता है। नंदा के अनुरोध पर विजय ने अमेठी से जुड़ी कई घटनाएं बताईं, जिसमें 'हू स्मृति' से अमेठी के ताकतवर शुक्ला परिवार के मुखिया की प्रियंका गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी और उस पर स्मृति इरानी कठोर प्रतिक्रिया शामिल थी। विजय ने पुस्तक के अन्य पहलुओं, उत्तर प्रदेश की राजनीति, संघ की भूमिका, नेहरू परिवार आदि की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। सेलिब्रिटी लेखक के जवाब में विजय ने कहा कि हिंदी के लेखकों की भी लाख प्रतियां बिकें, यही मेरी कामना है। विजय ने सवाल-जवाब सत्र में श्रोताओं के हर तरह के सवाल का बखूबी उत्तर दिया और कहा कि अमेठी संग्राम एक परिवार के खिलाफ जनता के उठ खड़े होने की कहानी है। फाउंडेशन और अहसास वूमेन की ओर से श्वेता अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

कलम नोएडा के प्रायोजक हैं श्री सीमेंट। हॉस्पिटैलिटी पार्टनर होटल हॉलीडे इन मयूर विहार और मीडिया पार्टनर दैनिक जागरण हैं।

Pictures

Anant Vijay – Author, Vartika Nanda – Moderator
L to R – Anant Vijay, Vartika Nanda, Geeta Shree
WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.28
WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.29 (2)
WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.31 (2)
WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.32 (1)
WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.32
WhatsApp Image 2021-03-19 at 11.42.34
Anant Vijay
Anant Vijay
Anant Vijay
Anant Vijay

Video