Geet Chaturvedi

28th June 2021

प्रेम पलों में जीता है, वर्षों में नहींः गीत चतुर्वेदी

मैं चांद जैसा हूं। रोज मेरा रूप बदलता रहता हूं। कुछ समय दिखता रहता हूं, कुछ दिन खोया रहता हूं। जब खोया रहता हूं, तब काम करता रहता हूं। दार्शनिक भी रहता हूं।" यह कहना है कवि, कथाकार गीत चतुर्वेदी का। वे प्रभा खेतान फाउंडेशन की ओर से आयोजित कलम बेंगलुरु के वर्चुअल सत्र में श्रोताओं से मुखातिब थे। आरंभ में फाउंडेशन और अहसास वूमेन की ओर से सुरेखा प्रह्लाद ने स्वागत और परिचय दिया। चतुर्वेदी से संवाद अहसास वूमेन, लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल की संस्थापक निदेशक और लखनऊ एक्सप्रेशन सोसाइटी की उपाध्यक्ष कनक रेखा चौहान ने किया। चतुर्वेदी ने अपने नाम, बचपन और मुंबई शहर के अपने लेखन पर खुलकर प्रभाव की चर्चा की।

मुंबई की मध्यवर्गीय बस्ती, चाल में रहने वाले लोगों के जीवन पर हास्य के सहारे 'अमलतास की लड़कियां' और उसके पहल में छपने का जिक्र करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि मुंबई एक ऐसा महानगर है, जो हजारों गांवों से मिलकर बना है। मैं लेखक हूं, कवि हूं, क्या हूं के सवाल के बीच अपने बारे में यह आश्वस्ति से कह सकता हूं कि मैं एक अच्छा पाठक हूं। जब मैं जीवन में निराश था तब मुझे किताबों ने बुलाया। छोटा था तो जयशंकर प्रसाद, निराला, रघुवीर सहाय, कुंवर नारायण की कविताएं। विश्व साहित्य में पाब्लो नेरुदा सहित दुनिया भर के लेखकों ने लुभाया। कवि कुंवर नारायण का उल्लेख करते हुए चतुर्वेदी ने कहा कि वे मेरे जीवन में आदर्श की तरह हैं। जैसे चांद सूरज की तरफ देखता है। मैं ने उनकी रोशनी से खुद को रोशन किया है।

जिस बड़े लेखक से मैं पहली बार मिला था वे ज्ञान रंजन थे। उन्होंने कहा था कि साहित्य कोई सौ मीटर की दौड़ नहीं है। यह एक मैराथन है। इसमें लगातार दौड़ते रहना है। मैं अपने हर काम को धैर्य से करता हूं, यह कद्दावर लोगों की सलाह थी। पढ़ाई हमारी आत्मा का आहार है। अगर हम अच्छा खाना खाएंगे तो हमारा शरीर सुडौल होगा। अच्छा साहित्य हमारी मनुष्यता को निश्चित आकार देता है। हमें बेहतर मनुष्य बनाता है। चतुर्वेदी ने कविता- आलू खाने वाले भी सुनाई, जिसकी कुछ पंक्तियां यों थीं.

एक सौ दस साल पहले जो लोग खा रहे थे आलू
वे अब भी आलू खा रहे हैं
अभी-अभी भट्ठी या उपलों की सुस्त आग से निकले
राख लगे आलुओं का रंग है यह....

चतुर्वेदी ने उम्मीद जताई कि ये दुनिया बदलेगी। मजदूरों की जिंदगी में बदलाव आएगा। उन्होंने सिनेमा से लेखक के संबंध, तकनीक, फोटोग्राफी, कथानक, निर्देशन की बारीकी सहित विश्व सिनेमा और साहित्य पर खुल कर चर्चा की और अपने प्रेम की दास्तान भी सुनाई। उन्होंने कहा, " प्रेम मंजिल रहित यात्रा है। आप इसमें हर क्षण यात्रा में हैं। जितनी देर आप इस यात्रा में हैं वही इस जीवन को सुंदर बना देता है। प्रेम प्रतिस्पर्धा नहीं आनंद है...प्रेम पलों में जीता है, वर्षों में नहीं। उन्होंने प्रेम में डूबी हुई कविता सुनाई-
नींद में मुस्कराओगी तो फरिश्तों को जलन होगी,
वो तुम्हारे सपनों की तलाशी लेंगे और मैं पकड़ा जाऊंगा..

कलम बेंगलुरु के हॉस्पिटैलिटी पार्टनर ताज वेस्ट एंड बेंगलुरु हैं। अहसास वूमेन का सहयोग मिला।

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