अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी, समकालीन हिंदी साहित्य के वरिष्ठ कवि, कला मर्मज्ञ और चिंतक हैं। 16 जनवरी, 1941 को दुर्ग में पैदा हुए वाजपेयी ने साल 1970 में अपने निबंध-संग्रह 'फ़िलहाल' से हिंदी आलोचना के क्षेत्र में प्रवेश किया। आपने भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़कर लगभग 35 वर्ष तक विविध पदों पर रहकर देश की सेवा की और प्रशासनिक दायित्वों के साथ कला, साहित्य और संस्कृति के प्रति अपनी सक्रियता बरकरार रखी। वाजपेयी की पहचान आज समकालीन हिंदी साहित्य के एक प्रमुख स्तंभ, एक मुखर रचनाकार के रूप में होती है। आपने कविता, साहित्य, संस्कृति, संगीत, रूपंकर कलाओं आदि पर हिंदी और अंग्रेजी में खूब लिखा। हिंदी आलोचना की भाषा को नई ताजगी और सूक्ष्मता देने के साथ-साथ उसे सामाजिक संवाद का हिस्सा बनाने में भी वाजपेयी की सार्थक भूमिका है। उनकी प्रकाशित आलोचना पुस्तकों में 'फ़िलहाल', 'कुछ पूर्वग्रह', 'कविता का गल्प', 'सीढ़ियां शुरू हो गई हैं', 'कभी-कभार', 'यहां से वहां', 'कुछ खोजते हुए', 'पुनर्भव', 'समय से बाहर' आदि शामिल हैं।

आप साहित्य अकादमी पुरस्कार, दयावती मोदी कवि शेखर सम्मान, कबीर सम्मान, समन्वय भाषा सम्मान आदि से अलंकृत हैं। फ्रेंच और पोलिश सरकारों ने आपको अपने उच्च नागरिक सम्मान दिए हैं। साल 2011 में आपको उत्तर प्रदेश सरकार के भारत भारती पुरस्कार से भी नवाजा गया, पर आपने उसे स्वीकार नहीं किया। महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के संस्थापक-कुलपति, केन्द्रीय ललित कला अकादमी के अध्यक्ष और रजा फाउंडेशन के प्रबंध-न्यासी के रूप में आपने हिंदी भाषा, कला जगत और संस्कृति की उल्लेखनीय सेवा की है। आप भारत भवन न्यास के संस्थापक न्यासी सचिव और अध्यक्ष भी रहे हैं। हिंदी आलोचना की पत्रिका 'पूर्वग्रह' का लगभग 16 वर्षों तक सम्पादन भी किया। वाजपेयी अपनी कविताओं में हमेशा विनम्र, प्रेम-पिपासु, उत्सुक अन्वेषक से लगते हैं, जिसे जीवन जगत से गहरा प्रेम है। आप समकालीन काव्यशास्त्र की बनी-बनायी रुढ़ियों के प्रचलित रास्तों को छोड़ कर अपनी राह पर चलने वाले निर्भय कवि है। साहित्यिक पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अशोक वाजपेयी का उल्लेखनीय योगदान है। साहित्यिक पत्रकारिता से अपने लगाव के चलते ही आप समवेत, पहचान, पूर्वग्रह, बहुवचन, कविता एशिया, समास आदि से जुड़े और 'द बुक रिव्यू‘ समेत अनेक पत्रिकाओं के सलाहकार संपादक भी रहे।

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