ब्रजेंद्र कुमार सिंघल

लेखक, इतिहासकार और संत साहित्य के मर्मज्ञ ब्रजेंद्र कुमार सिंघल का जन्म 23 नवंबर, 1956 को राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले की गंगापुर सिटी में हुआ। आपने रामस्नेही संत श्री कीर्तिराम से संस्कृत साहित्य और दादूपंथी संत श्री धनीराम से वेदांत ग्रंथों का अध्ययन किया। दोनों ही गुरुओं के सान्निध्य में आपने संत वाणियों का मर्म पहचाना और भारतीय धार्मिक पथ पर मील का पत्थर सरीखे संत साहित्य से जुड़ गए। बीस वर्ष की उम्र में आपकी पहली पुस्तक प्रकाशित हुई। आज आप भारतीय इतिहास, संस्कृति, पाठा-लोचन, संपादन कला, रामस्नेही संप्रदाय, दादू पंथ सहित संत-भक्त संप्रदाय के साहित्य व इतिहास लेखन के प्रतिष्ठित विद्वान माने जाते हैं।

अब तक सिंघल की पैंसठ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुके हैं। श्री रामस्नेही-संदेश सहित अनेकों पत्र-पत्रिकाओं में भी आपके सैकड़ों लेख, शोध-आख्यान प्रकाशित हो चुके हैं। मीरांबाई की प्रामाणिक जीवनी और मूल पदावली ने आपको दुनिया भर में लोकप्रियता दिलाई। इसी तरह राजस्थान की क्षत्राणियों के इतिहास पर लिखी आपकी पुस्तक 'रानी पद्मिनी' भी खूब चर्चा में रही। आप अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही- संप्रदाय, प्रधानपीठ-शाहपुरा, प्रधानपीठ दादूपंथ नरायना, मीरां- स्मृति संस्थान चित्तौड़गढ़, साहित्य-मंडल नाथद्वारा व भारतीय विद्यामंदिर कोलकाता आदि संस्थाओं से सम्मानित किए जा चुके हैं।

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