फरहत शहजाद

ग़ज़लकार और गीतकार फ़रहत शहज़ाद 1955 में पाकिस्तान में पैदा हुए और अपनी रचनाओं से एक बड़ी पहचान बनाई। शहज़ाद ने अपनी औपचारिक प्रारंभिक स्कूली शिक्षा सातवीं जमात तक ही हासिल की, पर बाद में जब अवसर मिला तो कराची यूनिवर्सिटी से एक्सटर्नल कैंडिडेड के रूप में अंग्रेजी से एमए किया। शहज़ाद के पिता शायर शौकत अली भारत के हरियाणा राज्य के कैथल जिले के निवासी थे। आपका ननिहाल लखनऊ में था। देश के बंटवारे के दौरान पूरा परिवार पाकिस्तान चला गया। पिता सरकारी नौकरी में थे, लिहाजा पाकिस्तान के कई शहरों में इन परवरिश हुई। शहज़ाद ने 1975-76 में शायरी लिखनी शुरू की, तो सिलसिला अब तक जारी है। 1980-81 के दौरान इनकी मुलाकात मेंहदी हसन से हुई, जहां से इनके अदबी सफर ने रफ्तार पकड़ी। इनकी ग़ज़लों पर जोश मलीहाबादी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, अहमद फ़राज, बशीर बद्र और वसीम बरेलवी के अशआर का खासा असर रहा है।

शहज़ाद की ग़ज़लों को 1983 में ‘कहना उसे’ अलबम से खासी शोहरत मिली, जिसमें उस्ताद मेंहदी हसन द्वारा गाई गई आपकी नौ ग़ज़लें शामिल हैं। शहज़ाद की ग़ज़लों को जगजीत सिंह, गुलाम अली, आबिदा परवीन, हरिहरन, लता मंगेशकर और कई दिग्गज ग़ज़ल गायकों ने अपनी आवाज देकर सराहा है। शहज़ाद ने मेहंदी हसन और लता मंगेशकर द्वारा गाया एकमात्र युगल गीत भी शहज़ाद का लिखा हुआ ही है। उनकी प्रकाशित रचनाओं में ‘मत सोचा कर’, ‘आड़ी तिरछी चंद लकीरें’, ‘आईना झूठा है’, ‘सुन पाओ अगर’ और ‘गुलरत’ शामिल हैं। उर्दू में लिखी उनकी तमाम ग़ज़लों और नज़्मों को देवनागरी लिपी में पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित किया गया। शहज़ाद को साहिर लुधियानवी पुरस्कार और कई अन्य पुरस्कारों से नवाज़ा गया है। शहज़ाद की दो शादियां हुईं और दोनों ही पत्नियां हिंदुस्तान की हैं, लिहाजा हिंदुस्तान से उनका राफ्ता बराबर बना रहा।

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